18 Nov 2020

योग से रोग उपचार



योग हर उम्र एवं हर उम्र के समूह के लिए उपयुक्त है,और विभिन्न रोगो के पारम्परिक उपचारो के साथ-साथ पूरक चिकित्सा के रूप में भी इसका उपयोग किया जाता रहा है। कई मामलो में ऐसा भी देखा है कि योग जन्मजात रोगो से छुटकारा दिलवाने में भी कायम रहा हैं फिर चाहे वो रोग आंतरिक हो या बाहरी।


1.अस्थमा:आजकल के पर्यावरण में होते हुए बदलावों एवं खान-पान में आए बदलावों की वजह से इंसान अक्सर नई-नई बीमारियों से ग्रसित हो जाता है उनमे से ही एक है अस्थमा, अस्थमा से पीड़ित इंसान जीवन में बहुत सी चीज़ो का आनंद नहीं ले पाता। अस्थमा से ग्रसित रोगी इस समस्या से निपटने के लिए अनेक नुस्खे अपनाते रहते हैं परन्तु वे सबसे आसान तरीका भूल जाते हैं, जो की है योग। तो आइये बात करते हैं कि किस तरह के योग से अस्थमा के रोगी अपना जीवन आसानी से एवं सुगमता से यापन कर सकते हैं।


पवनमुक्तासन : अस्थमा से पीड़ित लोगो के लिए यह आसन काफी उपयोगी है क्यूंकि यह पाचन में और गैस के निर्गमन में मदगार है।


श्वासन : यह मुद्रा आपको ध्यान अवस्था में ले जाती है और आपको चिंतामुक्त एवं मानसिक दबावों से मुक्त करती है। यह शांत और तनावमुक्त योग शरीर को अस्थमा से निपटने में मदद करता है।


नाड़ी शोधन प्राणायाम : यह आसन मन एवं शरीर को तनाव से मुक्त करने एवं सांस लेने की तकनीक एवं विधियों को कैसे नियोजित करते हैं में मदद करता है।


भुजंगासन :  भुजंगासन वैसे तो कई तरह के रोगो के लिए उपयोगी योग है परन्तु अस्थमा में बहुत ही उपयोगी है क्यूंकि यह रक्त परिसंचरण में सुधार करती है।


डायबिटीज: डायबिटीज एक घातक बीमारी है, जो आजकल काफी व्यापक हो चुकी हो और साधरणतया लोगो में पाए जानी वाली बीमारियों में से एक हैं। परन्तु अन्य रोगो की तरह इस रोग का उपचार भी योग द्वारा हल किया जा सकता है।

कपाल-भाती : किसी भी मधुमेह रोगी के लिए कपालभाती सर्वोत्तम विकल्प है। यदि किसी मधुमेह रोगी द्वारा इस तकनीक का नियमित अभ्यास किया जाये तो उसके रोगी पर नियंत्रण किया जा सकता है। यह योग का एक अत्यंत प्रभावकारी रूप है।


त्रिकोणासन : त्रिकोणासन करने से शरीर को स्टैमिना और एनर्जी मिलती है इसके सिवा यह आसन नाभि को ठीक रखने में भी सहायक होता है।


पश्चिमोत्तानासन : पश्चिमोत्तानासन को नियमित रूप से दिनचर्या में शामिल करने से पेट की पेशियां मजबूत होती है जो पाचन सम्बन्धी बीमारियों में सहायक सिद्ध होती है।


अर्ध मत्स्येन्द्रासन : अर्ध मत्स्येन्द्रासन डायबिटीज रोगी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण योग है, यह शरीर को अंतरीक रूप से साफ रखने का कार्य करता है, पाचन में भी मदद करता है।


 हृदय सबंधी रोग: वैसे तो लोगो में कई तरह के रोग प्रायः देखे जाते हैं परन्तु आजकल लोगो में सबसे ज्यादा देखने जाने वाले रोग हृदय सम्बन्धी होते हैं जो की न सिर्फ घातक हैं अपितु जानलेवा भी हैं। तो आईये अब हम जानते हैं की किस तरह के योग से हम हृदय सम्बन्धी रोगो से छुटकारा पा सकते हैं।

त्रिकोणासन : त्रिकोणासन दिल से समबन्धी एवं श्वसन सबंधी रोगो से छुटकारा दिलवाने में अत्यंत उपयोगी है। इस योग की मदद से छाती में विस्तार होता है, श्वसन प्रक्रिया लयबद्ध हो जाती है। यह योग आपका स्टैमिना भी बढ़ाने में मददगार साबित होता है।


वीरभद्रासन : वीरभद्रासन शरीर में मांशपेशियों की गतिविधियो फिर चाहे वे शरीर के किसी भी अंग की बात की जाये को बढ़ता हैं एवं हृदय सम्बंधित बीमारियों से छुटकारा दिलाता है।


अधोमुखोस्वांसना : अधोमुखोस्वांसना योग को नियमित रूप से दिनचर्या में शामिल करने से रक्त का संचरण हृदय में नियमित रूप से बना रहता है जिसकी वजह से हृदय स्वस्थ्य एवं रोगो से मुक्त रहता है।


धनुरासना : धनुरासन द्वारा हम हृदय सम्बन्धी रोगो का निवारण कर सकते हैं। धनुरासन हृदय के आस पास का क्षेत्र को मजबूत बनता है, और ये पुरे शरीर को लचीला एवं ऊर्जावान बनता है।


4.रक्तचाप नियंत्रण: प्रायः रक्तचाप से सम्बन्धी रोग लोगो में देखा जाता है फिर चाहे वो उच्च रक्तचाप हो या निम्न रक्तचाप। रक्तचाप कई विभिन्न तरह के रोगो को भी जन्म देता है। तो रक्तचाप को नियंत्रित करना अत्यंत आवश्यक है तो आईये बात करते हैं की किस तरह के योग को अपनाते हुए हम रक्तचाप समबन्धी रोग से छुटकारा पा सकते हैं।


सुखासन : यह आसन शरीर एवं दिमाग को शांत रखने में मदद करता है, यह आसन मनुष्य के नर्वस प्रणाली पर कार्य करता है। यह हाइपरटेंशन को कम करता है एवं रक्तचाप को बनाये रखता है।


अधोमुखो स्वानासन : अधोमुखो स्वानासन सबसे उपयोगी आसनों में से एक है रक्तचाप नियंत्रण के लिए, यह आसन शरीर में रक्त संचरण को काबू में रखता है। अधोमुखो आसन तनाव एवं उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करता है।


श्वासना : कोई भी योग इस योग के बिना अधूरा है, यह एक अतिआवश्यक योग है जब इस योग को धारण करते हैं तो दिमाग एवं शरीर को आराम मिलता है एवं हमारा रक्तचाप नियंत्रित अवस्था में आ जाता है।


सेतु बन्धासना : यह आसन शरीर में धीरे बहते हुए रक्त को उचित शक्ति प्रदान कर रक्तचाप को नियंत्रित करता है।


5.थाइरोइड: थाइरोइड एक चिकत्सीय स्थिति है जो थाइरोइड ग्रंथि के कार्य को प्रभावित करती है। यह एक अवटु ग्रंथि है,जिसमे हॉर्मोन के अनियंत्रित होने से यह बीमारी एक विकराल रूप ले लेती है। तो आइये दखते हैं की किस तरह के योग से इस समस्या का समाधान किया जा सकता है।


शिर्षासन्न : यह योग की उत्कृष्ट मुद्राओ में से एक है क्यूंकि इससे थाइरोइड ग्रंथियों के सीधे प्रबंधन में मदद मिलती है।  यह शरीर की चपापचयी कार्यो के संतुलन में सहायता करता है तथा शरीर में जागरूकता तथा सतर्कता लता है।


सर्वांगसंना : यह थाइरोइड ग्रंथि को उत्तेजित करने में मदद करता है और थयरॉक्सिन को नियंत्रित करता है। इस विशेष मुद्रा में उलटे मुद्रा के कारन टांगो से सिर के भाग में रक्त प्रवाहित होता है जिससे अवटुग्रंथि को कम करने में सहायता मिलती है।


हलासन्न : यह योग गर्दन को संपीडन देता है जिससे पेट और थाइरोइड ग्रंथि को उत्तेजित किया जाता है। यह मस्तिष्क को शांत करता है और तनाव और थकन को कम करता है जिस वजह से इसका नाम हलासन्न पड़ा।


मत्स्यासनना : इस आसन में जब आप अपनी गर्दन को खींचते हैं तो यह आपकी थाइरोइड ग्रंथियों को उत्तेजित करता है।  यह आसन तनाव को कम करता है, शरीर को आराम देने और अवसाद को रोकने में मदद करता है जो थाइरोइड का कारन हो सकता है।